Monday, October 24, 2011

प्रभु प्रकाश

परमेश्वर के ध्यान में ,  जिसने लगाईं  है  लगन 
उसको मिली सुख-शांति ,मन उसका रहे मगन 

काम, क्रोध, मद, मोह ,लोभ, सब शत्रु  है  बलवान 
इनके दमन के लिए ,कर सको तो करो पूरा जतन
परमेश्वर के ध्यान में ,  जिसने लगाईं  हो लगन 
उसको मिली सुख-शांति ,मन उसका रहे मगन 

खुद को बना लो निर्मल, मन  की शांति  के लिए
ईर्ष्या की अग्नि से बचे,जो दिल में करे  है जलन
परमेश्वर के ध्यान में ,  जिसने लगाईं  है  लगन 
उसको मिली सुख-शांति ,मन उसका रहे मगन 

जग में सबसे प्यार कर , त्याग दे तू बैर भाव को
छोड़ दे टेढ़ी चाल को ,ठीक कर  तू अपना चलन 
परमेश्वर के ध्यान में ,  जिसने लगाईं  है  लगन 
उसको मिली सुख-शांति ,मन उसका रहे मगन 

उसकी  माया अदभुत  है ,जिसने  रचा  संसार है 
दुःख चिंता सब त्याग दे ,ले तू बस उसकी शरण 
परमेश्वर के ध्यान में ,  जिसने लगाईं  है  लगन 
उसको मिली सुख-शांति ,मन उसका रहे मगन 





Sunday, October 23, 2011

प्रभु माया

कोई चंद्रमा में देख ले, है प्रभु आभा तेरी 
तेज सूरज का नहीं, है वो प्रभु छाया तेरी 

तेरी महिमा का बखान,करती  है  रचना तेरी
आके जगत में देख ले, कोई  भी महिमा तेरी 

तेरी इस सुन्दरता की है सारी दुनियाँ गवाह
तेरी सरपरस्ती में , ये चल रही दुनियाँ तेरी 

तेरी शरण की चाह में फिर रहा  अमन तेरा 
दिल में बस तू है , मिलने की  है आशा तेरी

अब तो कर नज़रे करम, मेरे प्रभु 'अमन' पे
कब से  जप  रहा हूँ  मैं , प्रभु  मैं  माला  तेरी 

माँ का दर

मांगो खुदा से सबके लिए , सबको सबकुछ मिल जायेगा
गर मांगोगे तुम खुद के लिए,खुदा खुद ही समझ जायेगा
अब आ  गए  हो दर पर उसके , जब अपने अपनों के लिए 
कुछ देर भले हो जाये शायद,कोई दर से खाली न जायेगा 
हर वक्त  याद रखो खुदा को,खुदा ही वक्त पर काम आएगा 

जा रहो  हो  किधर , फिरते  क्यों  दर बदर
आ भी जाओ इधर, ये है अम्बे रानी का दर 
जगदम्बे माता का दर,  न  फिरो  दर बदर 

माँ से रोशन है जहाँ,मुरादें पूरी करता है माँ
तेरा  भी  कट  जायेगा , करेगी  दाती  महर
आ भी जाओ इधर, ये है अम्बे रानी का दर 
जगदम्बे माता का दर,  न  फिरो  दर बदर 


माँ का लश्कर जब चले,दुखियों की आस बंधे 
दुःख छूमंतर हो जाये,माँ करे जब हमपे महर
आ भी जाओ इधर, ये है  अम्बे रानी का दर 
जगदम्बे  माता का दर,  न  फिरो  दर बदर 

माँ की शान है निराली,दर से कोई गया न खाली
देख लो तुम जिधर,गाँव गली से शहर शहर
आ भी जाओ इधर, ये है अम्बे रानी का दर 
जगदम्बे माता का दर,  न  फिरो  दर बदर 






Monday, June 20, 2011

कौन है ?

हम खुद कितना जानते है, क्या खुद को पहचानते है?

इतनी विशाल धरती और अपार हवा-पानी का भंडार
इस रहस्यमय ब्रह्माण्ड का   आखिर निगहबान कौन है?

जहां के लोग क्यों लड़ते है? , मरते है धर्म के लिए
शायद पता नहीं उन्हें  कि, हममें  से  इन्सान  कौन है ?

पल पल का सुख  जी लेने को  अब  आमादा  है हर कोई
नहीं जानते तो बस  हम , जिन्दगी की पहचान कौन है?

तिल तिल कर जी रहे है हम बस अपनों के लिए
किसे पता  रंग बदलती दुनियां में अरमान कौन है?

बस हम खुद को तराशें , सब विकारों को त्यागकर
वर्ना इस पाप-नफरत की दुनियां में भगवान् कौन है?




पेट बड़ा शैतान

पेट की गहराई भाई , किसको समझ है आई
वो भी जान नहीं पाया जिसने ये दुनियां बने
क्योंकि पेट बड़ा शैतान रे पगले पेट बड़ा शैतान.......

पेट की खातिर इन्सां , जाने कितने पाप कमाए
पेट की खातिर इन्सां ने , धर्मो  के जाल बिछाए

भगवन और इन्सां के बीच पेट का ही झगड़ा है
भगवन ने इन्सां को तो पेट के लिए ही रगड़ा है

पेट  ही सारे  झगड़े  की जड़ , है  यारों  संसार की
धन दौलत सब पेट की खातिर वर्ना है बेकार की

पेट के कारण ही इन्सां - अल्लाह  है सामान
फर्क है तो बस लेनेवाले से देनेवाला है महान

देता है वो भी सबको लेकिन कुछ लेने के बाद
बस  थोड़ी  सी  श्रद्धा  और  थोड़ा  सा  विश्वास 

इसलिए  तो कहता हूँ मैं लो मेरा कहना तू मान
क्योंकि पेट बड़ा शैतान रे पगले पेट बड़ा शैतान.......





Sunday, May 1, 2011

भगवन भक्ति

साफ़ कर लो सब दिलों को,तुम इंसानी फरिश्तों!
कब जाने अलखशक्ति के आने का,पैगाम आ जाये
कब जाने  किस  भक्त  का ,  भाग्य संवर  जा जाये

आओ  सब  प्रभु  भक्ति  में ,  ऐसे  रम जाये
भक्त  और  भगवन के बीच , वक्त थम जाये
ऐसे करे  भक्ति  की भगवन को  गुमान हो जाये
साफ़ कर लो सब दिलों को,तुम इंसानी फरिश्तों!
क्या जाने कब अलखशक्ति का , पैगाम आ जाये
कब जाने  किस भक्त का ,  भाग्य संवर जा जाये

ये धरती बने स्वर्ग , हर किसी को मिले मोक्ष
मिट जाये इस धरती से, धर्म-जाति सब दोष
मन मंदिर परमशक्ति का , परमधाम बन जाये
साफ़ कर लो सब दिलों को,तुम इंसानी फरिश्तों!
क्या जाने कब अलखशक्ति का , पैगाम आ जाये
कब जाने  किस भक्त का ,  भाग्य संवर जा जाये




Saturday, April 30, 2011

मीठी बोली

मीठी बोली-प्यार की होली
बोली  में  है  अगर  मिठास 
बनते  हैं  सब  रिश्ते   खास
इंसानियत  की  है  ये पहचान
हर  मानव  बस  करे  आभास

बिछड़ों  को  भी  ये  लाती  है  पास
दुश्मनी का  भी  करती सत्यानास
बस बोलकर देखो तुम कड़वी बोली
खुद को  ही  लगे  बन्दूक  की गोली

बोलकर  देखो   बस  मीठी  बोली
हरतरफ से  होगी  प्यार की होली
जब जब किसी ने , मीठी जुबान बोली
लोगों ने प्यार से भर दी उसकी झोली